सरकारी प्रशासनिक सेवाओं में एक और प्रवेश द्वार राज्य सिविल सेवाएँ (SCS) हैं, जिन्हें प्रांतीय सिविल सेवाएँ (PCS) भी कहा जाता है। प्रत्येक राज्य लोक सेवा आयोग हर वर्ष राज्य सिविल सेवाओं में भर्ती के लिए प्रतियोगी परीक्षा आयोजित करता है। इस परीक्षा के माध्यम से उम्मीदवारों का चयन निम्नलिखित सेवाओं में किया जाता है:

  • राज्य सिविल सेवा, क्लास-I (SCS)
  • राज्य पुलिस सेवा, क्लास-I (SPS)
  • ब्लॉक विकास अधिकारी
  • तहसीलदार/तालुकदार/सहायक कलेक्टर
  • अबकारी और कराधान अधिकारी
  • जिला रोजगार अधिकारी
  • जिला कोषाधिकारी
  • जिला कल्याण अधिकारी
  • सहायक रजिस्ट्रार सहकारी समितियाँ
  • जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी
  • कोई भी अन्य क्लास-I/क्लास-II सेवा जो राज्य द्वारा अधिसूचित हो

ये सभी सेवाएँ प्रशासनिक स्तर पर उत्कृष्ट अवसर प्रदान करती हैं। कुछ वर्षों की सेवा के बाद SCS और SPS के अधिकारी क्रमशः IAS और IPS में नामांकन की उम्मीद कर सकते हैं। SCS अधिकारियों को उप-मंडल मजिस्ट्रेट, डिप्टी कलेक्टर, भूमि अधिग्रहण कलेक्टर, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, नगर प्रशासक, अवर/उप सचिव, निदेशक आदि के पदों पर तैनात किया जाता है। SPS अधिकारी डिप्टी/अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में नियुक्त किए जाते हैं। इन सेवाओं का एक प्रमुख लाभ यह है कि अधिकारी एक ही राज्य में कार्य करते हुए मूल्यवान अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।

राज्य सिविल सेवाओं में अधिकांश पद कार्यकारी प्रकृति के होते हैं और अधिकारी सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू करने के लिए सीधे जिम्मेदार होते हैं। सरकारी नीतियों के क्रियान्वयन में अग्रणी भूमिका निभाने का मानसिक संतोष इस करियर की विशेषता है।

परीक्षा

राज्य सिविल सेवा परीक्षा संबंधित राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाती है। रिक्तियों की संख्या राज्य सरकार द्वारा भेजी गई मांग पर निर्भर करती है। यह संख्या पदोन्नति, सेवानिवृत्ति और कैडर विस्तार जैसे कारणों से वर्ष दर वर्ष बदलती रहती है।

(a) पात्रता
सभी स्नातक इस परीक्षा में भाग लेने के पात्र हैं। न्यूनतम आयु 21 वर्ष है, जबकि अधिकतम आयु राज्य के अनुसार 28 से 35 वर्ष तक होती है। विभिन्न श्रेणियों के लिए आयु सीमा में छूट प्रदान की जाती है। साक्षात्कार के दौरान उम्मीदवारों को राज्य की भाषा, संस्कृति और परंपराओं का ज्ञान होना आवश्यक है। यह परीक्षा अत्यंत प्रतिस्पर्धी होती है।

(b) परीक्षा योजना
परीक्षा का पैटर्न UPSC सिविल सेवा परीक्षा के समान होता है। बड़े राज्य प्रारंभिक परीक्षा आयोजित करते हैं जबकि छोटे राज्य सीधे मुख्य परीक्षा कराते हैं। अधिकांश राज्यों ने UPSC की तरह ही पाठ्यक्रम और पैटर्न अपनाया है, केवल भाषा पत्रों के अंक मेरिट में शामिल किए जाते हैं। सामान्य अध्ययन में राज्य से संबंधित प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं।

(c) व्यक्तिगत साक्षात्कार
मुख्य परीक्षा के बाद साक्षात्कार आयोजित किया जाता है। साक्षात्कार का उद्देश्य उम्मीदवार की उपयुक्तता का मूल्यांकन करना है। मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के अंकों के आधार पर अंतिम मेरिट सूची बनाई जाती है।

कैसे तैयारी करें
चूँकि UPSC और राज्य सिविल सेवा परीक्षा का पैटर्न लगभग एक समान है, इसलिए दोनों परीक्षाओं की तैयारी एक साथ की जा सकती है। कोचिंग संस्थानों से मार्गदर्शन लिया जा सकता है, लेकिन आत्म-अध्ययन सबसे प्रभावी है। वैकल्पिक विषयों का चयन सावधानी से करें और वही विषय चुनें जिनमें आपकी रुचि हो।

सामान्य अध्ययन और अंग्रेज़ी पर विशेष ध्यान दें। राज्य से संबंधित सामग्रियों को अलग से संकलित करना होगा। अखबारों, वर्ष पुस्तिकाओं, आर्थिक सर्वेक्षण आदि का नियमित अध्ययन आवश्यक है।

अतिरिक्त जानकारी
परीक्षा से संबंधित विस्तृत जानकारी विज्ञापन और निर्देश पुस्तिका में उपलब्ध होती है। कुछ राज्यों में परीक्षा हर वर्ष नहीं होती, इसलिए उम्मीदवारों को अवसर आने पर तैयार रहना चाहिए।